Sunday, April 26, 2015

जलजला..!!!

कल जमीन के थरथराने से,
सब कुछ बिखर गया।
उसने न जाति देखी, न धर्म
मंदिर भी मिट गए,
और मस्जिद भी।
समाप्त कर दिया
हज़ारो साल पुरानी
विरासतों का अस्तित्व।
झकझोर दिया इंसान को
भीतर तक,
शायद धरती के गर्भ में
किसी बच्चे ने करवट बदली है,
सिर्फ करवट है ये तो
अभी बाकि है उस बच्चे का
जन्म लेना…… !!!!!


Sunday, April 19, 2015

स्केच .....!!!!!

अँधेरे रौशनी की दस्तक है,
इसलिए इन सह्या रातो के बाद 
उगता है सूरज, 
किसी दूसरे जहां से 
अस्त होने के लिए, 
ताकि तारो का मिलाप भी संभव हो सके ।  
शुन्य आकाश से नील अम्बर तक, 
रूह को आराम मिल सके ।  
शायद यह जवाब था.. 
मेरे प्रश्न का ।  
की क्यों तुम गहरे काले चित्र उकेरती हो हमेशा ?
क्योकि यही दस्तक है, 
सुनहरे कल की, एक खूबसूरत रोशनी की ……!!!!!!

अमृता - इमरोज़ के प्रेम पत्र

मेरे इमरोज़ !!! आज मेरे हाथ से मेरी कलम छूट गई - शायद आज वह मेरे एक सौ चालीस लाख पंजाबियों के घर-घर जाकर उन्हें कुछ पूछने बताने चली गई है ...