दिल्ली में तीन लड़किया भुख से मर गयी। अगर आप अभी भी अपने रहनुमाओ पर फ़िदा है तो बहुत बेहतर है, आपके लिए समाज, सरकार, योजनाएँ जैसी चीजे बहुत बेहतर ढंग से चल रही है। आप खुश हो सकते है कि "आधार लिंक" हो जाने से सभी को राशन बहुत आसानी से मिलने लगा है और विकास भारत के आखरी छोर तक पहुंच चुका है, जहां तक सूरज की रौशनी भी नहीं पहुंच पाती है वहां तक। विदेशों से हमारे संबंध बहुत अच्छे हो गए है और 'गाय माता' अब गिफ्ट देने के काम भी आ रही है।
तीनों लड़कियों में शिखा आठ साल की थी, मानसी चार साल की थी और पारुल दो साल की थी। पोस्टमार्टम की रिपोर्ट में भी साफ़ हो गया है कि मौत का कारण भूख ही था। भूख से मौत की खबरे पहले अफ़्रीकी देशो से आती थी पर अब भारत से भी आने लगी है और किसी पिछड़े राज्य से नहीं हमारी राजधानी से, जो पहले की "रेप कैपिटल" के नाम से मशहूर है। केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार को बधाई देना चाहिए कि दिल्ली के माथे पर एक और तमगा लग गया है।
हमारी सरकारे बूचड़खाने के उस मालिक की तरह है जो अपने मुताबिक जानवरों (समाज) को बदलती है। तमाम बूचड़खाने के मालिक रात में किसी डिस्को में बैठ कर जैम कर पार्टी करे है और कैमरे के सामने आँसू बहाते है और अपने-अपने भूचडख़ाने से निकले मांस के लोथड़ो को खुद भी खाते है और अपने पालतुओं को भी खिलाते है। भारत ही वो देश होगा जहाँ सरकारी योजनाएँ राजधानी दिल्ली में ही ठीक ढंग से लागू नहीं हो पा रही है और दावे किये जाते है कि हमने सारे देश को रोशन कर दिया।
आखिर में बस इतना ही...... मुझको मेरा भारत दे दो, तुम्हारा इंडिया तुमको मुबारक।