Sunday, May 8, 2016

ये क्या 'हैप्पी मदर्स डे' लगा रखा है....?

मदर्स डे अर्थात माँ दिवस को बीते हुए 1 घण्टा 33 मिनट और 50 सेकण्ड हो चुका है, पर कुछ लोगों को अभी भी अहसास है इसका। वैसे ये बेहतर है कि लोगों को इसका अहसास ताउम्र रहे तो। खैर मुझे भी लगा कि शायद यह सही है कि सभी चीजों का एक खास दिन चुन लो और जी भरकर उस एक खास चीज के लिए प्यार उड़ेल दो ताकि फिर साल भर तक वो चीज परेशान ना करे प्यार और अपनेपन के लिए। और बधाई हो इसके साथ ही हम आधुनिक हो गये, सभी के लिए एक दिन मयस्सर करके। पर याद रखो भारत भूमि हमेशा से ही पर्व और उल्लास की धरती रही है, यहाँ रोज ईद-दिवाली मनाए जाने की परंपरा रही है। पर खैर अब हम आधुनिक हो गये है।
आज फेसबुक, ट्विटर और वाट्सएप पर माँ के लिए प्यार देख कर आँखे भर आई। पर इसका थोड़ा भी प्यार असल जीवन में भी होता तो हम कब के कलंदर हो गये होते।

मेरे मुताबिक भारत में किसी भी चीज का दिन तय करना बेवकुफी है क्योंकि यहां ये मुमकिन नही है। मेरी माने तो असली मदर्स डे तब होगा, 
जब हम अपनी माँ-बहनों की गालिया नही बोलेगे, 
जब माँ बचा-कुछा जुठा खाना नही खाएगी, 
जब माँ घर में सबसे पहले खाना खाएगी क्योंकि खाना वही बनाती है, 
जब सभी वृद्ध आश्रम में ताला जड़ दिया जाएगा, 
जब घर का पुरूष अपने गंदे और जूठे, कपड़े-बर्तन स्वयं साफ नही करेगा, 
कोई बच्चा अपनी दादी-नानी से खराब व्यवहार के लिए मार खाएगा 
और जब माँ को भी वीकएंड मिलेगा। 
                                                इस स्थिति के बाद ही बोलिएगा कि हम माँ, बीबी, बहन, लड़की और महिलाओं का थोड़ा भी सम्मान करते है। ये मुश्किल तो बहुत ज्यादा है, क्योंकि इससे पुरूष प्रधान समाज की खोखली, गूढ़ और लादी हुई परंपरा का अंत होगा और अंततः पुरूष प्रधान समाज का विध्वंस होगा। फिर आएगी "समानता।"

हाँ, एक बात है, "माँ" शब्द अपने आप में "बाबा" के बिना अधुरा है और ये दोनों खुदा मिलकर ही हम और आप जैसे इंसानों का सृजन करते है। वैसे मैंने कही सुना भी है कि, "माँ के पैरों के नीचे जन्नत है और बाबा उस जन्नत मे जाने का दरवाजा है।" आप भगवान की पूजा ना करे ना सही पर माँ-बाबा की सेवा और सम्मान जरूर करे।

बाकि क्या है, देश तो चल ही रहा है। अब चिल करो और आराम से तान के सो। कूलर में पानी माँ ने भर ही दिया है और सबेरे के नाश्ते और आपके पसंद के खाने का इंतजाम करके रखा है और पानी की चिल्ड बाटल आपके बिस्तर के बगल मे रखी है, ताकि रात में कोई परेशानी ना हो आपको। अभी 2 बजे माँ सोने जा रही है और हमेशा कि तरह सुबह सुरज को मात दे देगी, क्योंकि आपको काॅलेज-स्कूल जाने मे देरी ना हो। अरे वो आपकी यूनिफाम छूट गयी थी प्रेस करने से अब माँ वो प्रेस करके ही सोएगी।
गुड नाइट माँ 

अमृता - इमरोज़ के प्रेम पत्र

मेरे इमरोज़ !!! आज मेरे हाथ से मेरी कलम छूट गई - शायद आज वह मेरे एक सौ चालीस लाख पंजाबियों के घर-घर जाकर उन्हें कुछ पूछने बताने चली गई है ...