Sunday, April 26, 2015

जलजला..!!!

कल जमीन के थरथराने से,
सब कुछ बिखर गया।
उसने न जाति देखी, न धर्म
मंदिर भी मिट गए,
और मस्जिद भी।
समाप्त कर दिया
हज़ारो साल पुरानी
विरासतों का अस्तित्व।
झकझोर दिया इंसान को
भीतर तक,
शायद धरती के गर्भ में
किसी बच्चे ने करवट बदली है,
सिर्फ करवट है ये तो
अभी बाकि है उस बच्चे का
जन्म लेना…… !!!!!


3 comments:

अमृता - इमरोज़ के प्रेम पत्र

मेरे इमरोज़ !!! आज मेरे हाथ से मेरी कलम छूट गई - शायद आज वह मेरे एक सौ चालीस लाख पंजाबियों के घर-घर जाकर उन्हें कुछ पूछने बताने चली गई है ...