सिमट कर रह गया है,
मेरा और तुम्हारा
संबंध
उस एक छण में,
जब कबुला था तुमने
मेरा सलाम,
आज भी मेरे जहन में
ताजा है,
तुम्हारी मुस्कुराती वो छवि
और वो एक नाम
जो तुमने कभी दे दिया था मुझे
विरले ही |
आज घड़ी के सामने बैठकर
सोच रहा हूँ,
क्या इतना ही था हमारा संबंध?
समय की धूल, यादो के ताबूत को
कितने जल्दी पुराना कर देती है ना |
पर शुक्र है
आज भी वो यादे जिन्दा है
मेरे जहन में,
एक खुशनुमा एहसास की तरह...!!!
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