Wednesday, May 6, 2015

बुद्ध का शेष.……साँची ।

साँची का स्तूप
जिसमे विश्वास है, वर्षो का ।
तपस्या है, एक इंसान की ।
साधना है, एक महापुरुष की ।
उद्धभव है, एक नये धर्म का ।
अहिंसा के विचार का,
शांति की महान स्थिति का ।
एक कहानी है,
सिद्दार्थ से बुद्ध तक की ।
जहा मेल होता है,
आत्मा और परमात्मा का ।
वहा शक्ति है,
ध्यान की, ईश्वर में विश्वास की ।
शायद जीवित है आज भी
"बुद्ध"
अपने ही शेष मे……… ( बुद्ध पूर्णिमा )

No comments:

Post a Comment

अमृता - इमरोज़ के प्रेम पत्र

मेरे इमरोज़ !!! आज मेरे हाथ से मेरी कलम छूट गई - शायद आज वह मेरे एक सौ चालीस लाख पंजाबियों के घर-घर जाकर उन्हें कुछ पूछने बताने चली गई है ...